Thursday, October 6, 2022
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Ban On Sugar Export: गेहूं के बाद अब सरकार की नजर चीनी निर्यात के प्रतिबंध पर, इन वजहों से सरकार उठाएगी कदम

Ban On Sugar Export

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली: देश में गेहूं के निर्यात समीति करने के बाद अब क्रेंद्र सरकार की नजर चीनी है। सरकार बहुत जल्द देश में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकती है। अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है तो छह साल में पहली बार देश में चीनी का निर्यात पर प्रतिबंध होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार चीनी निर्यात प्रतिबंध को लेकर आने वाले दिनों में कदम उठा सकती है। इससे जुड़े एक व्यक्ति से मिली जानकारी के मुताबिक, विश्व में बढ़ती ग्लोबल खाद्य महंगाई की वजह से सरकार इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की विचार रही है, ताकि देश में चीनी के निर्यात को समीति किया जा सके।

सितंबर तक 10 मिलियन टन निर्यात की योजना

आगे उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि सितंबर तक चलने वाले मार्केटिंग ईयर में चीनी निर्यात 10 मिलियन टन हो, ताकि अक्टूबर में अगला चीनी सीजन शुरू होने से पहले पर्याप्त देश में भंडारण हो। सरकार यह कदम फूड सप्लाई सिक्योरिटी के एहतियाती उपायों के तहत उठाएगी।

इन देशों ने भी लगाया प्रतिबंध

इसस पहले सरकार ने देश में गेहूं के दाम सीमित करने के लिए इसके निर्यात में रोक लगाई थी। हालांकि इस दौरान कुछ विशेष देशों को छूट का प्रवाधान दिया था। रूस के यूक्रेन पर हमले से पहले से ही वैश्विक खाद्य कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है। इसको देखते हुए एशिया में कई देशों ने कई चीजों के निर्यात पर रोक लगा दी है। इस कड़ी में इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा तो वहीं, मलेशिया 1 जून से चिकन निर्यात पर रोक लगने जा रहा है। इतना ही नहीं कई देश अपने यहां वस्तुओं के निर्यात पर रोक लगा रहे हैं ताकि देश के अंदर महंगाई को काबू किया जा सके।

16 मिलियन टन का सरप्लस चीनी भंडार

हालांकि, विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक निर्यात के प्रतिबंध को लेकर को भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पिछले साल ब्राजील के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक था। भारत ने बांग्लादेश इंडोनेशिया, मलेशिया और दुबई को सबसे ज्यादा चीनी निर्यात किया है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन से आई जानकारी के मुताबिक, देश में इस सीजन में चीनी 35 मिलियन टन उत्पादन के साथ 27 मिलियन टन खपत होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। पिछले सीजन के लगभग 8.2 मिलियन टन के भंडार सहित, इसके पास निर्यात के लिए 10 मिलियन सहित, 16 मिलियन टन का सरप्लस है। भारत द्वारा चीनी निर्यात रोकने से विश्व चीनी बाजार में प्रभाव पड़ने के आसार हैं।

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