Tuesday, August 9, 2022
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देश की बैंकों में लगातार हो रहा अन्क्लेम्ड राशि का इजाफा, RBI के पास 48 हजार करोड़ से अधिक राशि

Increase in Unclaimed Amount

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली। देश के बैंकों में लगातार अन्क्लेम्ड राशि की संख्या में इजाफा हो रहा है। इन राशियों की संख्या की इजाफा बैंकों खातों में सही जानकारी नहीं होने से हो रहा है। वॉयस ऑफ बैंकिंग के संस्थापक अशवनी राणा ने इंडिया न्यूज बिजनेस को बताया कि भारतीय बैंकों के पास बिना दावे वाली राशि लगातार बढ़ती जा रही है। राणा ने आरबीआई का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में देश की बैंकों के पास बिना दावे वाली राशि करीब 48 हजार करोड़ रुपये हो गयी है।

चला जागरुकता अभियान फिर भी बढ़ी अन्क्लेम्ड राशि

उन्होंने कहा कि आरबीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में बैंकों में बिना दावे वाली राशि बढ़कर 48,262 करोड़ रुपए हो गई है। इस पर आरबीआई की ओर एक बयान भी आया था। इस बयान पर आरबीआई ने कहा था कि बैंकों द्वारा कई जागरुकता अभियान चलाया गया है। हालांकि इस अभियान के बाद भी बैंकों में बिना दावे वाली राशि लगतार बढ़ती जा रही है।

क्या है आरबीआई की अन्क्लेम्ड राशि की गाइडलाइन

राणा ने कहा कि अन्क्लेम्ड राशि केंद्रीय बैंक की एक गाइडलाइन है। इस गाइडलाइन के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बैंक में अपने खाते से 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं करता है तो उस खाते में जमा रकम अन्क्लेम्ड हो जाती है। इसके अलावा जिस खातों से लेनदेन नहीं किया जा रहा वह निष्क्रिय (Dormant account) हो जाता है। उसके बाद अन्क्लेम्ड राशि को रिजर्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में डाल दिया जाता है। उसके बाद भी अगर व्यक्ति इस राशि पर अपना क्लेम्ड करता है तो उसे पैसा वापस दे दिया जाता है। हालांकि इसके लिए उसको एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

क्यों बढ़ रही अन्क्लेम्ड राशि

अश्नवनी राणा ने देश के बैंकों में अन्क्लेम्ड राशि बढ़ने की पीछे की वजहों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी बैंक खाते के निष्क्रिय होने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें खाता धारक की मृत्यु होना, परिवार वालों को मृतक के खाते के बारे में जानकारी न होना, गलत पता या फिर खाते में नॉमिनी दर्ज न होना है। इन सब समस्या के चलते उस खाते की रकम बाद में परिवारजनों को मिलना मुश्किल हो जाता है। वहीं, खाते में नॉमिनेशन न होने और खाता सिंगल नाम से खाताधाकर की मृत्यु के बाद रकम लेना और मुश्किल हो जाता है। कोर्ट के ऑर्डर लेना पड़ता है।

खाता में नॉमिनी जरूर बनाएं

उन्होंने कहा कि बैंकों के सभी खाता धारकों को देखना चाहिए कि उनके खाते में घर का सही पता और नॉमिनी का नाम लिखा है या नहीं। यदि नहीं लिखा है तो बैंक में इसको अपडेट करवाना चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को सभी तरह के खातों में दो लोगों के नाम से जॉइंट एकाउंट खोलना चाहिए नहीं तो नॉमिनेशन अवश्य करवाना चाहिए। बैंकों में नॉमिनेशन की सुविधा सभी तरह के खातों और लॉकर में भी उपलब्ध होती है।

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