Wednesday, September 28, 2022
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Union Minister Meeting: केंद्रीय इस्पात मंत्री ने एसआरटीएमआई के अधिकारियों के साथ की बैठक, लौह और इस्पात उद्योग में प्लास्टिक अपशिष्ट उपयोग” शीर्षक वाली रिपोर्ट पर हुआ मंथन

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली।  

Union Minister Meeting: केंद्रीय इस्पात मंत्री राम चन्द्र प्रसाद सिंह ने भारतीय इस्पात अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मिशन (एसआरटीएमआई) के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को एक बैठक की। यह बैठक एसआरटीएमआई द्वारा लौह और इस्पात उद्योग में प्लास्टिक अपशिष्ट उपयोग” शीर्षक वाली रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार विर्मश करने के लिए हुई। बैठक दिल्ली के उद्योग भवन में आयोजित हुई। केंद्रीय इस्पात मंत्री सिंह ने बैठक की अध्यक्षता के दौरान उन्हें रिपोर्ट पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

इस रिपोर्ट की प्रस्तुति के दौरान उन्हें दिखाया गया है कि किस तरह कोक बनाने, ब्लास्ट फर्नेस आयरन बनाने, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस स्टील बनाने जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में प्लास्टिक कचरे के उपयोग के लिए लौह और इस्पात उद्योग बड़े पैमाने पर काम कर सकता है।

इस्पात मंत्री ने मामले को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ उठाने का निर्देश दिया, ताकि स्टील क्षेत्र को भी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में शामिल किया जा सके और आगे विचार-विमर्श और बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा सके। हालांकि अधिकांश प्लास्टिक अपशिष्ट, उद्योग द्वारा उपयोग किए जाने वाले कोयले की तुलना में, उच्च ऊर्जा के अलावा कार्बन और हाइड्रोजन का स्रोत हैं और राख, क्षारीय पदार्थों आदि से मुक्त हैं।

आज भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत लगभग 13.6 किलोग्राम है, जबकि विश्व औसत लगभग 30 किलोग्राम है। भारत हर साल लगभग 18 मिलियन टन प्लास्टिक की खपत कर रहा है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे उन्नत देशों की तुलना में बहुत कम है, जहां प्रति व्यक्ति खपत 80-140 किलोग्राम के बीच भिन्न है। इस प्रकार, यह अनुमान है कि भारत में भी भविष्य में प्रति व्यक्ति खपत में वृद्धि हो सकती है और लौह और इस्पात उद्योग आने वाले समय में सबसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से प्लास्टिक कचरे का सबसे अच्छा अंतिम उपयोगकर्ता होगा।

बैठक में बताया गया कि प्लास्टिक कचरे का उपयोग आज हमारी दुनिया के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। यह सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और नैतिक मुद्दों में से एक बन गया है। फूड रैपर, प्लास्टिक बैग और पेय की बोतलें जैसे सिंगल-यूज प्लास्टिक लैंडफिल, नदियों को तेजी से भर रहे हैं।

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