Monday, August 15, 2022
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कोरोना से ज्यादा रुस-यूक्रेन के युद्ध ने ढकेला लोगों को गरीबी रेखा पर, UNDP की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Russia Ukraine War Increase Poverty

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की गुरुवार को आई एक रिपोर्ट ने दिल दहला देने वाले आंकड़ें पेश किये हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि जिनता विश्व में लोगों को कोरोना महामारी के चलते बंद पड़ी अर्थव्यवस्था से  प्रभाव नहीं पड़ा था, उसके कहीं अधिक पिछले 24 फरवरी से शुरु हुए रुस और यूक्रेन के युद्ध ने डाला है। इस युद्ध के चलते लोगों की आमदनी काफी प्रभावित हुई है। साथ ही, भारत समेत विश्व में खाने पीने और एनर्जी के कीमतें आसमान को छूने लगी हैं। हालत यह हो गई बीते तीनों महीनों के अंदर 7 करोड़ के अधिक लोग अतिरिक्त गरीबी में आ गए।

5.16 करोड़ से अधिक लोग कर रहे 1.90 डॉलर में गुजारा 

UNDP की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन युद्ध के वजह से पिछले तीन महीनों में 5.16 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी में आ गए हैैं। यह लोग अब 1.90 डॉलर (94.82 रुपये) में गुजारा कर रहे हैं, जबकि दो करोड़ वह लोगों हैं, जो 3.20 डॉल डॉलर (252.86 रुपये) में जीने में मजबूर हैं। दरअसल, विश्व में 500 करोड़ से अधिक लोग,जोकि दुनिया की करीब 70 फीसदी जनसंख्या है। यह जनसंख्या या तो गरीबी में हैं या फिर गरीबी रेखा के नीचे फिसल सकते हैं।

इन देशों को हुआ सबसे अधिक प्रभाव 

रूस और यूक्रेन का युद्ध का असर इन दोनों देश पर तो पड़ ही रहा है। साथ ही, इसकी चपेट में पूरा यूरोप के साथ अन्य देश भी हो रहे हैं। वहीं, सबसे बुरा असर अर्जेंटीना, इजिप्ट, इराक, टर्की, फिलीपींस, रवांडा, सूडान, केन्या, श्रीलंका और उजबेकिस्तान हुए. इसके अलावा अफगानिस्तान, इथियोपिया, माली, नाइजीरिया और यमन पर देखने को मिल रहा है। इन देशों की जनता पहले ही गरीबी रेखा में जीवन जीने पर विवश हैं। दरअसल, कम आय वाले देशों में परिवार अपनी आय का 42 फीसदी हिस्सा खाने पर वहन करता है। ऊपर से युद्ध के चलते रूस पर प्रतिबंध ने तेल और गेहूं, चीनी व कुकिंग ऑयल जैसे वस्तुओं के दामों को उछाल दिया हैं। वहीं, यूक्रेन के पोर्ट बंद होने के चलते यह कम आय वाले देशों को अनाज निर्यात हो पा रहा है और खाद्य चीजों के दाम बढ़ रहे,जिसके चलते लाखों लोग गरीबी से प्रभावित हो गए हैं।

कोरोना में इतने लोगों आए गरीबी रेखा के नीचे

यूएनडीपी के मुताबिक, कोरोना महामारी से चलते विश्व में लगे लॉकडाउन से और आर्थिक गातिविधियों के सुस्त पड़ने से बीते 18 महीनों 12.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए,जबकि रुस और यूक्रेन यु्द्ध के चलते महज तीन महीने में ही 7.1 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं।

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