Tuesday, December 6, 2022
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आरबीआई ने रेपो रेट में किया 4.40 फीसदी का इजाफा, युद्ध ने पैदा की वैश्विक बाजार में नई चुनौतियां

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इंडिया न्यूज,नई दिल्ली।

देश में बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा झटका दिया है। RBI ने रेपो रेट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। दरों बढ़ोतरी का फैसला आरबीआई की आपात बैठक में लिया गया है। हालांकि आरबीआई ने अकोमोडेटिव रुख में इस बैठक में कोई बदलाव नहीं करते हुए यथास्थिति बरकारर रखी है और कहा कि अगली बैठक में अकोमोडिव की बढ़ोतरी पर फैसला हो सकता है।

MPC की बैठक में लिए निर्णय

केंद्रीय बैंक ने 2 मई और 3 मई को MPC की आपात बैठक की है। इस बैठक में रेपो रेट और ब्याज दरों की बढ़ोतरी को लेकर फैसला लिया गया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया तो वहीं ब्याज दर में 0.40 फीसदी का इजाफा हुआ है। आरबीआई ने मई, 2020 के बाद से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. माना जा रहा था कि जून से रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन उससे पहले ही गवर्नर ने अचानक दरें बढ़ा दीं।

अकोमोडेटिव रुख बरकरार

MPC की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआई के  गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फेंस कर कहा कि आरबीआई ने रेपो रेट और ब्याजों दरों में इजाफा किया है। फिलहाल अकोमोडेटिव रुख बरकरार रखा है। इसे आगे बदला जा सकता है।

सीआरआर में भी हुई बढ़ोतरी

वहीं, आरबीआई ने बाजार में मौजूद अतिरिक्‍त पूंजी तरलता को घटाने के लिए बैंकों का सीआरआर में भी बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी 0.50 फीसदी की है। इस वृद्धि के साथ अब बैकों का कैश रिजर्व रेशियो (CRR) बढ़कर 4.50 फीसदी हो गया है। इस पर गवर्नर दास ने कहा कि इस कदम से बाजार में मौजूद करीब 83,711.55 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त पूंजी को वापस बैंकों में लाने पर मदद मिलेगी। आपको बता दें कि बढ़ी हुई सीआरआर की नई दरें 21 मई, 2022 की मध्‍यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगी।

युद्ध ने पैदा की नईं चुनौतियां

आगे दास ने कहा कि देश में  महंगाई की बढ़ती दर चिंताजनक है। हम पिछले दो साल से कोरोना महामारी से जूझ रहे थे। लोगों की स्थिति को सुधारने के लिए तमाम तरह की रियातें प्रदान की गई थीं। रुस और यूक्रेन के युद्ध ने फिरसे नई चुनौतियों को पैदा कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में न सिर्फ कमोडिटी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, बल्कि सप्‍लाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है। ऊपर से महंगाई का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है, इसलिए रेपो रेट को बढ़ाना पड़ा।

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