Friday, December 9, 2022
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MSP Hike: केंद्र ने 6 रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाई, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 110 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा

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केंद्र सरकार ने देश में खाद्यान्नों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी का एलान किया है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन मौसम 2023-24 के लिए सभी रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है।

इसके तहत दलहन (मसूर) के एमएसपी में 500 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्ण उच्चतम वृद्धि को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने सरसों की MSP में 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। वहीं जूट की MSP में 110 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सभी सिफारिशों को कैबिनेट से मंजूरी मिली है।

केंद्र सरकार ने एमएसपी बढ़ाने का फैसला कर किसानों को दिवाली का बड़ा तोहफा दिया है। बता दें कि CACP ने गेहूं समेत सभी रबी फसलों की एमएसपी में 9% बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।

मसूर की एमएसपी 5500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 6000 रुपये हुई

मसूर की MSP को 5500 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। इसके अलावा, गेहूं की MSP में 110 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। यह अब 2015 रुपये बढ़कर 2125 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
क्या होता है

क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)?

MSP या न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत है जिस पर सरकार, किसानों से फसल खरीदती है। ऐसे में सरकार किसानों से जिस भाव पर खाद्यान खरीदती है उसे ही न्यूतम समर्थन मूल्य या MSP (Minimum Support Price) कहा जाता है। किसी फसल का MSP इसलिए तय किया जाता है ताकि किसानों को किसी भी हालत में उनकी फसल का उचित न्यूनतम मूल्य मिलता रहे। वर्तमान में, सरकार खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उगाई जाने वाली 23 फसलों के लिए एमएसपी तय करती है।

वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में किया जाता है न्यूनतम समर्थन मूल्य

सरकार की तरफ से MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का एलान कृषि लागत व मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs & Prices, CACP) की सिफारिश पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में किया जाता है। गन्ने का समर्थन मूल्य गन्ना आयोग तय करता है।

क्या हैं MSP के फायदे

इससे किसानों को फसलों के एक वाजिब दाम मिलने की उम्मीद रहती है और साथ ही सार्व​जनिक वितरण प्रणाली के द्वारा उपभोक्ताओं को पर्याप्त मात्रा में अनाज भी मिल जाता है, क्योंकि सरकार एमएसपी पर बड़ी मात्रा में अनाज की खरीद करती है. इससे किसानों में एक तरह से वाजिब कीमत मिलने का भरोसा पैदा होता है और इसीलिए वे विविध तरह की फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं. 

कब शुरू हुई थी MSP

भारत में सबसे पहले साल 1966-67 में गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की गई थी. तब देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी और अनाज की तंगी से जूझ रहे देश में कृ​षि उत्पादन बढ़ाना सबसे प्रमुख लक्ष्य था. फसलों की एमएसपी तय करने में मुख्य आधार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश होती है

इसके अलावा सरकार राज्य सरकारों और संबंधित मंत्रालयों की राय भी जानती है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की स्थापना साल 1965 में की गई थी.  पहले इसका नाम कृषि कीमत आयोग था जिसे 1985 में बदला गया. यह कृषि मंत्रालय से जुड़ा है. इसका काम ही है कि फसलों की लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश सरकार को करना.

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