Thursday, December 1, 2022
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Impact of Russia And Ukraine War : क्रूड आयल ही नहीं, आटा और बिस्कुट खरीदना भी होगा महंगा

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Impact of Russia And Ukraine War

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली:
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ना शुरू हो गया है। न केवल क्रूड आयल के दाम बेलगाम हुए हैं बल्कि कमोडिटी मार्केट में भी इसका असर दिख रहा है। इसी कारण कीमती धातु सोने की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं अब आपके लिए आटा (Wheat Flour) और बिस्कुट खरीदना भी महंगा हो सकता है।

आपको रेस्टोरेंट में खाने के लिए भी ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। दरअसल, 9 दिन से जारी युद्ध के कारण गेहूं की कीमतें भी बढ़नी शुरू हो गई है। इससे कंपनियों और ग्राहकों (Consumers) दोनों पर असर पड़ेगा। यहां जानना जरूरी है कि भारत अपनी जरूरत में से अधिकतर गेहूं का निर्यात करता है।

वहीं रूस दुनिया का गेहूं निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है। जबकि यूक्रेन दुनिया में गेहूं का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में कुल 20 करोड़ टन के गेहूं का निर्यात किया जाता है। कुल निर्यात में रूस और यूक्रेन का हिस्सा करीब 5 से 6 करोड़ टन का है। यानी दुनिया में गेहूं के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से होता है, जिन दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है।

खुले बाजार में इतनी बढ़ी गेहूं की कीमतें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण बहुत सारी चीजों के साथ गेहूं की सप्लाई चैन में भी बड़ी रूकावट आई है। इससे खुले बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ी हैं। तमाम कंपनियां, जिसमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं, खुले बाजार से ही गेहूं खरीदती हैं। यहां गेहूं के दाम बीते 15 दिनों में 85 रुपए क्विंटल बढ़ गए हैं।

अब जब कंपनियां ज्यादा दाम पर गेहूं की खरीद करेंगी तो उनके प्रोडक्ट की कीमत भी बढ़ेगी। ग्राहकों के लिए आटे से बने प्रोडक्ट्स जैसे बिस्कुट, मैदा आदि चीजों को खरीदना महंगा हो जाएगा। इसके अलावा बड़े ब्रांड्स के रेस्टोरेंट में खाना भी महंगा होने वाला है।

भारत के पास अच्छा मौका

रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से गेहूं की सप्लाई चैन का टूटना भारत के लिए पॉजीटिव संकेत भी हो सकता है। दरअसल, रूस और यूक्रेन जो गेहूं के सबसे बड़े निर्यातक हैं, वहां सप्लाई चैन में रूकावटें हैं। ऐसे में, भारत गेहूं का उत्पादन बढ़ाकर दुनिया का एक बड़ा गेहूं के लिए निर्यातक के तौर पर सामने आ सकता है।

फिलहाल भारत गेहूं का दूसरा बड़ा उत्पादक है। बताया जा रहा है कि इस समय भारत के पास गेहूं की सप्लाई भी पर्याप्त है जो निर्यात बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

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