Friday, December 9, 2022
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खाद्य तेलों के भाव में आई कमी, जानिए अब क्या हैं इसके बाजार में रेट

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Fall in Price of Oilseeds

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली। देश में तेल-तिलहन के भाव में नरमी आई है। शनिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मूंगफली, सोयाबीन और पामोलीन तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। इस गिरावट का असर सससों तेल के भाव भी पड़ा है। कल दिल्ली बाजार में सरसों तेल के भाव में कमी आई है। आपको बता दें कि वैश्विक बाजार में जारी गिरावट से देश में तेल-तिलहन के दाम कम हुए हैं। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शिकागो एक्सचेंज में शुक्रवार को 4.5 फीसदी की बड़ी गिरावट देखे जाने का असर स्थानीय तेल-तिलहन बाजार पर पड़ा है। इस कमी का असर उतना अधिक नहीं दिखाई दिया है,क्योंकि घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों की आपूर्ति कम है।

घरेलू बाजार में शनिवार के तेल-तिलहनों के भाव

सरसों तिलहन – 6,825-6,830 (42 फीसदी कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल

मूंगफली -7,020-7085 रुपये प्रति क्विंटल

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,250 रुपये प्रति क्विंटल

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,695 – 2,865 रुपये प्रति टिन

सरसों तेल दादरी- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल

सरसों पक्की घानी- 2,130-2,260 रुपये प्रति टिन

सरसों कच्ची घानी- 2,200-2,315 रुपये प्रति टिन

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,000-19,500 रुपये प्रति क्विंटल

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,350 रुपये प्रति क्विंटल

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,150 रुपये प्रति क्विंटल

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,400 रुपये प्रति क्विंटल

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल

सोयाबीन दाना – 5,250-5,350 रुपये प्रति क्विंटल

सोयाबीन लूज 5,225- 5,325 रुपये प्रति क्विंटल

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल

आयात शुल्क छूट का लाभ नहीं मिल रहा उपभोक्ता को

दरअसल, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में छूट दी थी। हालांकि इस छूट के असर का लाभ  उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। सूत्रों ने कहा कि सरकार को खाद्य तेलों की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए सोयाबीन डीगम और सूरजमुखी तेल के आयात की सीमा को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए या पहले की तरह 5 फीसदी का आयात शुल्क लगा देना चाहिए। साथ ही, सरकार को तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

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