Tuesday, May 24, 2022
Tuesday, May 24, 2022
HomeBusinessप्राकृतिक खेती के बढ़ावे से गांवों में बढ़ेगा रोजगार: तोमर

प्राकृतिक खेती के बढ़ावे से गांवों में बढ़ेगा रोजगार: तोमर

नीति आयोग ने दिल्ली के विज्ञान भवन में सोमवार को नवोन्वेषी कृषि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्धाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तोमर ने किया।

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली।  

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्राकृतिक खेती ( Innovative Agriculture) को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी अभियान प्रारंभ किया है और इस दिशा में हमारा मंत्रालय भी मिशन मोड में कार्य करने जा रहा है। तोमर ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमारा प्रकृति के साथ तालमेल बढ़ेगा, जिसके कृषि क्षेत्र में गांवों में ही रोजगार बढ़ने सहित देश को व्यापक फायदे होंगे।

एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सिंह ने किया उद्धाटन 

नीति आयोग ने दिल्ली के विज्ञान भवन में सोमवार को नवोन्वेषी कृषि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्धाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तोमर ने किया। उद्धाटन कार्यक्रम को संबोधित कर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने रसायनिक खेती के दुष्प्रभावों का आंकलन करते हुए देश भर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा प्राकृतिक खेती रसायनमुक्त के साथ पशुधन आधारित खेती है। इसमें लागत कम आती है और किसानों की आय में वृद्धि व स्थिर पैदावार होगी तथा पर्यावरण व मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में सहायता प्रदान करती है।

बीपीकेपी की उपयोजना से किसानों को किया जा रहा प्रेरित

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने क लिए कृषि मंत्रालय द्वारा भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) की उप-योजना के जरिए देश के किसानों को प्रेरित प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ रहा और यह अब करीब चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच चुका है।

आर्गेनिक उत्पादों की मांग में आ रही तेजी

केंद्रीय मंत्री रूपाला ने कहा कि कोरोना के कारण लोगों के खान-पान में बदलाव आ रहा है और आर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिसकी पूर्ति के लिए संज्ञान लिया जाना चाहिए। खेती के सामने कई चुनौतियां हैं, उन पर फोकस करते हुए किसानों को नई मांग के अनुरूप प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

गुजरात के राज्यपाल देवव्रत ने प्राकृतिक खेती की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस खेती में पौधे को पानी नहीं, बल्कि नमी चाहिए होती है। इस पद्धति में पहले साल लगभग 50 प्रतिशत पानी कम लगता है और तीसरे साल तक लगभग सत्तर प्रतिशत पानी की बचत होने लगती है। इस विधा में जीवाणु काफी संख्या में बढ़ते हैं, जो खेती की जान होती है। मृदा में कार्बन की मात्रा भी बढ़ती है, जो मृदा स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है।

इन राज्य के मुख्यमंत्री जुड़े वर्चुअल रुप से 

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंह के अलावा कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी शामिल हुए, वहीं केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला वर्चुअल जुड़े थे। तकनीकी सत्रों में उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रमुख कृषि विशेषज्ञों ने उद्बोधन दिया।

ये भी पढ़ें : शेयर बाजार: कारोबारी सप्ताह के पहले दिन आई बाजार में गिरावट, 710 अंक नीचे लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी 17000 नीचे, ट्रेडिंग सेशन में गिरे 1553 शेयर्स

ये भी पढ़ें : अंबानी को पीछे छोड़ अदाणी बने दुनिया के छठे रईस, अंबानी नौवें व एलन मस्क पहले स्थान पर

ये भी पढ़ें : LIC IPO का बड़ा अपडेट: सरकार के फाइल किया अपडेटेड DRHP, 3.5 प्रतिशत ही बेचे जाएगी हिस्सेदारी, जानें प्रति शेयर की कीमत

Connect With Us: Twitter | Facebook Youtube

SHARE

MOST POPULAR