Sunday, August 7, 2022
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महंगाई से हल्की राहत, जून में 7.01% दर्ज खुदरा मुद्रास्फीति, 19.6% औद्योगिक उत्पादन रहने का अनुमान

Decline In Retail Inflation

इंडिया न्यूज,नई दिल्ली। खुदरा मुद्रास्फीति को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वह काफी सुखद देने वाले हैं।  भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) के मामले में जून माह में हल्की गिरावट आई है, जोकि लोगों के लिए राहत वाली खबर है। मंगलवार को आई जानकारी के मुताबिक, देश में जून के महीने में खुदरा मुद्रास्फीति की 7.01 फीसद रही है। हल्की गिरावट के बाद भी यह आंकड़ा रिजर्व बैंक के निर्धारित आंकड़ों से लगातार छठे महीने ऊपर रहा है। वहीं,दूसरी ओर औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि 19 फीसदी से अधिक रहने का अनुमान लगाया है।

इन वजहों से आई कमी

दरअसल, देश में पेट्रोल डीजल के दामों स्थिरता और खाना पकाने के तेल की कीमतों में कमी के चलते जून महीने में खुदरा मुद्रास्फीति की दर में हल्की गिरावट आई और जनता को महंगाई से थोड़ी राहत प्रदान हुई है। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से खाद्य निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की वजह से भी खुदरा मुद्रास्फीति दर की गिरावट की वजह बनी है। इससे पहले मई में देश में खुदरा मुद्रास्फीति मई में 7.04 फीसदी दर्ज की थी।

खाद्य पदार्थों मुद्रास्फीति 7 फीसदी से अधिक दर्ज

इसके अलावा जून, 2022 में खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 7.75 फीसद दर्ज की गई थी,जबकि मई में यह 7.97 के स्तर पर थी। वहीं, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2022 में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि 19.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) लगातार कमजोर रहने के बाद अप्रैल में 7.1 फीसद बढ़ा था। वहीं, ताजा आंकड़ों के मुताबिक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वृद्धि काफी प्रभावशाली दिख रही है।

जनवरी से 6 फीसदी से ऊपर बनी है खुदरा मुद्रास्फीति

आपको बता दें कि देश में बढ़ती महंगाई की रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में बेंचमार्क दो रेपो दर को बढ़ा दिया था। एक बार जून में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। दूसरी बार मई में 0.40 फीसदी का इजाफा किया था। कुल मई से जून तक 0.90 प्रतिशत की नीतिगत दर में इजाफा किया जा चुका है। केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जून में मुद्रास्फीति के 5.7 फीसद रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन देश में बढ़ती महंगाई के चलते अपने अनुमान को परिवर्तित करते हुए इसे 6.7 फीसद कर दिया था। आपको बता दें कि इस साल जनवरी से देश में खुदरा मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जिसके वजह से रिजर्व बैंक दो बार रेपो रेट में बदलाव कर चुकी है।

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